Friday, July 10, 2009
आदमी को आदमी के साथ खड़ा होना चाहिए
आदमी को आदमी के साथ खड़ा होना चाहिए। आदमी दीवारों के बीच खड़ा है इसलिए आदमी की आवाज नहीं सुन रहा है आदमी। आदमी पैसों की झनकार के बीच खड़ा है इसलिए अकेला है आदमी। अहंकारों के बीच खड़ा है आदमी इसलिए आदमी को दिखाई नहीं दे रहा है आदमी। आदमी को आदमी का चश्मा चाहिए, आदमी का दिल चाहिए। आदमी को आदमी के साथ खड़ा होना चाहिए।
Tuesday, July 7, 2009
इन्हें तो रोज सलाखों से दागो
आज इंडियन एक्सप्रेस पढ़ रहा था कि अचानक एक खबर ने मेरा ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शर्षक था, 'बोथ अक्यूज्ड रेप्ड विक्टिम, मोर दैन वन्स : एडमिनिस्ट्रेशन काउंसिलÓ हेडिंग के बाद खबर पढ़ी तो घटना की गंभीरता का पता चला। घटना चंडीगढ़ के सेक्टर 26 स्थित नारी निकेतन की है जहां काम करने वाले दो लोगों ने एक 19 वर्षीय मेंटली रिटार्डेड लड़की के साथ कई-कई बार बलात्कार किया। बलात्कार करने वालों में एक भूपेंद्र सिंह जबकि दूसरा 52 वर्षीय जमना कुमार(गार्ड नारी निकेतन) है। इन दोनों के खिलाफ केस दर्ज करने वाले यूटी एडमिनिस्ट्रेशन के वरिष्ठï वकील अनुपम गुप्ता का कहना है कि दोनों अभियुक्तों ने उससे पहले तो नारी निकेतन में बलात्कार किया और फिर बाद में जब उसे सेक्टर 32 के मेंटली रिटार्डेड इंस्टीट्ïयूशन में भेज दिया गया तो ये दोनों वहां जाकर भी बाथरूम में उसके साथ जबर्दस्ती की। पिलहाल वह गर्भवती है और पीजीआई साइकैट्रिस्ट डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अजीत अवस्थी का कहना है कि उसे पता है कि उसके पेट में बच्चा है और वह उसे खोना नहीं चाहती है। यह घटना समाज की उस मानसिकता को उजागर करता है जिसे सख्ती से रोके जाने की जरूरत है। ऐसे संस्थानों में ऐसे बच्चों को लेकर अति संवेदनशील लोगों को ही रखा जाना चाहिए। हां एक बात और है लड़कियों के संस्थान में जूडो या अन्य मार्शल आर्ट से प्रशिक्षित लड़कियों को ही रखा जाना चाहिए। लड़कों के संस्थान में लड़कों को। हां जहां तक पकड़े गए भूपेन्द्र और जमना की बात है तो इन्हें ताउम्र जेल के एक सेल में बंद कर देने की सजा दी जानी चाहिए और हर रोज गर्म सलाखों से पूरे अंग को दागा जाना चाहिए एवं जेल में ही इनकी मौत के बाद लाश को लावारिस कहीं फेंक दिया जाना चाहिए।
Monday, June 29, 2009
यह अंधेरे का अध्याय है
यह अध्याय कहीं से भी शुरू हो सकता है क्योंकि यह अंधेरे का अध्याय है जिसकी न कभी कोई शुरुआत थी और न ही कोई अंत दिखाई दे रहा है। इस अध्याय का जन्म ही अंधेरे में हुआ और भविष्य में गढ़े गए कई फ्रेम को चकनाचूर कर गया। जो सपना देखा, गढ़ा वह हकीकत में सांस लेने को आज भी छटपटा रहा है। साढ़े छह साल बीत गए हमारे इस अंधेरे सफर को, कुशाग्र भी इतने का ही हो चला है। हमारे तमाम दिली, दिमागी और शारीरिक मैराथन के बावजूद चलने, बोलने और बैठने में असमर्थ है। इस बीच अंधेरे के जिन्न ने एक और कलाबाजी की, कुशाग्र की मां अमृता भी मानसिक तौर पर कुंठित हो चली है। फोर्टिस ने उसे कुशाग्र की चिंता करते-करते डीप डिप्रेशन और ट्रॉमा में चले जाने की बात कही है। आलम यह है कि 19 मई को उसके पेट और स्पाइन में उठा तेज दर्द, होप नर्सिंग होम, पीजीआई चंडीगढ़ और फोर्टिस में दिखाने के बाद भी हर एक दो दिन पर ऊभर आ रहा है। सारे रिपोट्ïर्स नार्मल हैं सिवाय इंडोस्कोपी में उसकी अंातों में आया स्क्रैच पर डॉक्टर नागपाल (होप) और डॉ. अरविंद साहनी (फोर्टिस) का कहना है कि यह साइकाजनिक पेन है। हेप के डॉ. नीरज नागपाल और डॉ. साहनी ने उसे चिंता कम करने की सलाह दी है और खुश रहने को कहा है। इस बीच फोर्टिस के मनोचिकित्सक हरदीप सिंह ने उसे बेहद गंभीर मानसिक अवसाद में बताया है और नींद की दवा दी है।खैर अंधेरे के इस नए अध्याय के कारण कुशाग्र को सेराजेम से मिलने वाली थेरेपी रुक गई है, प्रयास की ऑक्युपेशनल व फिजियो थेरेपी भी छूट चुकी है। इस संघर्ष में फिलहाल मैं अकेला रह गया हूं। भगवान में मेरी अटूट आस्था भी अब डगमगाने लगी है। 27 जून की रात साढ़े 11 बजे मुझे आफिस में फोन आया कि अमृता के पेट में तेज जलन है। आफिस से जल्दी काम निपटा जब घर पहुंचा तो उसे भगवान के दरवाजे के पास लेटकर छटपटाता पाया। मेरे पहुंचते ही उसने भगवान के दरवाजे में ताला लगा देने को कहा, 'पूजा नहीं होगीÓ सब झूठ है। इन दिनों मेरे मकान मालिक और मित्रगण भी कहने लगे हैं, आप इतना पूजा पाठ करते हैं फिर आप के ही साथ ऐसा क्यों होता है। मैं भी अब सोचने को मजबूर हूं कि आखिर कब तक इम्तिहान लेंगे इश्वर। अब धीरे-धीरे कुशाग्र बड़ा हो रहा है और हम उम्रदराज। पिछले तीन-चार महीने से वह उसे नहाने बाथरूम तक ले जाने में असमर्थ हो गई थी। अब उसे मुझे ही नहलाना पड़ता है और इस दौरान मैंने महसूस किया कि नहलाने में रीढ़ की हड्ïडी अकड़ जाती है। बबली यानि अमृता बिना कुछ बोले एक साल तक जो कुश को उठाने, नहलाने सहित जो उसके सारे काम प्लस घर के काम करती रही इससे उसके शरीर पर गंभीर प्रतिकूल दबाव पड़ा और फिर भी उन्य बच्चों की तरह सामान्य न होने का मनोवैज्ञानिक तनाव भी साथ-साथ सालता रहा। गौर करने वाली बात यह है कि यह सिर्फ हमारी कहानी नहीं है, यह हम जैसे तमाम उन मां-बाप की कहानी है जिनके बच्चे सीपी के मरीज हैं। मैं ऐसे बच्चों के लिए एक आश्रम बनाने के लिए प्रयासरत हूं जहां ऐसे बच्चों को रखने और उनके समुचित देखभाल के लिए व्यवस्था की जा सके। इसमें समाज के प्रबुद्ध लोगों का मार्गदर्शन मुझे चाहिए। हां मेरा एक स्वार्थ भी इसमें निहित है जो मुझ जैसे तमाम माता-पिता के स्वार्थ से जुड़ा है कि कम से कम हम इस सुकून से मर सकें कि हमारे न रहने पर भी एक संस्था है जो हमारे बेटे और हम जैसे उन तमाम मां-बाप के बेटों की देखभाल कर सके। भारत सरकार से भी हमें इसमें मदद चाहिए। उम्मीद के साथ आपका अमलेन्दु अष्ठïानासीनियर सब एडीटर, दैनिक भास्कर चंडीगढ़।09217668495
Tuesday, June 23, 2009
आप सब बच्चों को आशीर्वाद
काफी दिनों से आप सब से बात नही कर पाया हूँ। अक्षम बच्चों के लिए समाज में चेतना जगाने की जरूरत है। समाज के हेर तपके से उन्हें आशीर्वाद चाहिए।
Wednesday, March 18, 2009
मंदबुद्घि बच्चों के बालों में मिला यूरेनियमजर्मन लैब की रिपोर्ट में खुलासा
क बारूद के ढेर पर बैठी है दुनिया। हम रचने का सामान कम और विनास का सामान ज्यादा तैयार कर रहे हैं। सृजन का दामन छोड़ जब इंसान संहार का दामन थाम ले तो उसके परिणाम घातक हाने ही होने हैं। हिरोसिमा और नागासाकी की विनास लीला भूल अफगानिस्तान में अक्टूबर 2001 से जनवरी 2003 तक 6 हजार से भी ज्यादा बमों व मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। जिसमें प्रयुक्त यूरेनियम की मात्रा 1000 टन तक होने की आशंका है और इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। इस संबंध में भासकर में छपी एक रिपोर्ट को साभार प्रस्तुत कर रहा हूं। परमजीत सिंह। फरीदकोट जर्मनी की रिसर्च लैब 'माइक्रो ट्रेस मिनरल लेबोरेट्रीÓ ने भारत से जांच के लिए गए सैंपल में से 82 से 87 फीसदी मंदबुद्घि बच्चों में यूरेनियम मौजूद होने की बात कही है। लैब इंचार्ज और वैज्ञानिक डॉ. ब्लॉर्क बुश के इस खुलासे की सूचना फरीदकोट सेंटर ने भारत सर•ार व राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग नई दिल्ली को भेज दी है। बाबा फरीद स्पेशल चिल्ड्रन सेंटर फरीदकोट द्वारा मई 2008 में 149 बच्चों के बाल सैंपल के रूप में जर्मनी भेजे गए थे। इन्हीं की जांच में डिप्लेटेड यूरेनियम मौजूद होने की आशंका जताई गई है। सेंटर में भारत के सभी प्रांतों के अलावा कनाडा, साउथ अफ्रीका सहित आठ मुल्कों के मंदबुद्धि बच्चे रह रहे हैं। सेंटर हेड डॉ. प्रितपाल सिंह ने बताया कि हमने 6 साल पहले यह सेंटर शुरू किया और मंदबुद्धि बच्चों की स्थिति में नेचरोपैथी और न्यूरोथेरेपी के जरिए सुधार लाने की बात कही।
Sunday, March 15, 2009
छल----
जिसे इंसान ने भी छला, भगवान ने भी छला और विज्ञान ने भी छला। ऐसे तन्हा, अपने आप में गुम, खोए-खोए से रहने वाले शारीरिक और मानसिक रूप से अक्षम नन्हे पंखों के बारे में सोचते हुए जो ख्याल आए उन्हें आप सब से बांटना चाहता हूं।
इसे एक कविता के रूप में आप सब के सामने परोस रहा हूं।
शीर्षक छल----
छल, छल से छलक गया, कोई छल गया/ वर्षों से जो यकीं था उनपर बर्फ सा पिघल गया/ कोई छल गया। झूठ के खिलाफ दम भरने वाले जो थे तमाम/उनसे सच भी कहा तो उनको खल गया/ छल, छल से छलक गया, कोई छल गया/सिरफिरों को समझाने की भूल की थी कभी/ अगले ही दिन सारा शहर दहल गया/ कोई छल गया।
अब ये गुस्ताखी फिर कभी नहीं/ कुछ कहते-कहते मैं फिर संभल गया/उनसे सच भी कहा तो उनको खल गया/ छल, छल से छलक गया, कोई छल गया।
इसे एक कविता के रूप में आप सब के सामने परोस रहा हूं।
शीर्षक छल----
छल, छल से छलक गया, कोई छल गया/ वर्षों से जो यकीं था उनपर बर्फ सा पिघल गया/ कोई छल गया। झूठ के खिलाफ दम भरने वाले जो थे तमाम/उनसे सच भी कहा तो उनको खल गया/ छल, छल से छलक गया, कोई छल गया/सिरफिरों को समझाने की भूल की थी कभी/ अगले ही दिन सारा शहर दहल गया/ कोई छल गया।
अब ये गुस्ताखी फिर कभी नहीं/ कुछ कहते-कहते मैं फिर संभल गया/उनसे सच भी कहा तो उनको खल गया/ छल, छल से छलक गया, कोई छल गया।
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